Modi ji ki rajneeti. Meri kalam se



धारा 370 से आगे की सोच रहे हैं मोदी

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ मिलकर पीएम मोदी ने कश्मीर को लेकर योजना बना ली है। सबसे पहले घाटी से आतंकियों और उनके समर्थकों का सफाया करा जाएगा। बताया जा रहा है कि धारा 370 से आगे की सोच रहे हैं पीएम मोदी और डोभाल। सूत्रों के मुताबिक़ पीएम मोदी की योजना है कि जम्मू-कश्मीर को तीन राज्यों में विभाजित किया जाएगा और जम्मू, कश्मीर व् लद्दाख तीनों को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा।

फिलहाल भारत में अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीऊ, लक्षद्वीप, पुदुचेरी और दिल्ली, ये 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं। भारत के अन्य राज्यों की अपनी चुनी हुई सरकारें होती हैं, लेकिन केन्द्र शासित प्रदेशों में सीधे-सीधे भारत की केंद्र सरकार का शासन होता है। भारत के राष्ट्रपति हर केन्द्र शासित प्रदेश का एक सरकारी प्रशासक या उप राज्यपाल नामित करते हैं।

*तीनों को बनाएंगे केंद्र शासित प्रदेश*

लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग तो पिछले कई दशकों से उठ रही है. मगर सूत्रों के मुताबिक़ सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के लिए पीएम मोदी की योजना केवल धारा 370 हटाने तक ही सिमित नहीं है। यहाँ का बॉर्डर पाकिस्तान व् चीन, दोनों से सटा है, राजनीति पार्टियां, राजनीति करने के चक्कर में कई बार पाकिस्तान या चीन की धुन गाती नज़र आती हैं।

यहाँ दुश्मन देशों की राजनीति पूरी तरह से ख़त्म हो जाए, इसके लिए पीएम मोदी ने इंतजाम करना शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर को तीन राज्यों में बांटकर तीनों को केंद्र शासिर प्रदेश बनाने से इन इलाकों में क्षेत्रीय राजनीति हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगी और ये इलाके हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएंगे। यहाँ अलगाववाद की गुंजाइश भी हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगी।

लद्दाख के बौद्धों की भी यही मांग

लद्दाख के बौद्ध काफी वक़्त से लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने की मांग तो उठाते ही रहे हैं। यहाँ का लेह ज़िला बौद्ध बहुल है जबकि कारगिल में क़रीब 99 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। 1979 से पहले लद्दाख एक ही ज़िला था लेकिन तब उसे बाँटकर दो ज़िले बनाए गए। यहाँ के बौद्धों का कहना है कि लद्दाख का ये विभाजन सांप्रदायिक आधार पर किया गया था।

लद्दाख़ बुद्धिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष त्सेरिंग सिम्फेल कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर राज्य का फिर गठन किया जाना चाहिए। इसके तहत जम्मू और कश्मीर को अलग राज्य का दर्जा दिया जाए और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाए। जबकि मुस्लिम बहुल कारगिल के लोग इसका विरोध करते हैं और कहते हैं कि लद्दाख जम्मू-कश्मीर के साथ साथ भारत का ही एक हिस्सा रहना चाहिए।

बौद्ध माँग

सिम्फेल कहते हैं कि ये कोई सांप्रदायिक माँग नहीं है। हम लद्दाख क्षेत्र के लिए केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा इसलिए माँगते हैं क्योंकि इसके दो ज़िलों लेह और कारगिल को “शेख़ अब्दुल्ला ने 1979 में सांप्रदायिक आधार पर ही विभाजित किया था।

“हम इन ज़िलों का एकीकरण इसलिए चाहते हैं क्योंकि इससे बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल करगिल दोनों ही ज़िलों के एक होने से सांप्रदायिक समरसता बनेगी।”

सिम्फेल के अनुसार, उनकी यह माँग राष्ट्रविरोधी भी नहीं है क्योंकि भारत में 1956 में केवल 14 राज्य थे जब राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिशों पर नए राज्य बनाए गए थे। लेकिन जम्मू-कश्मीर राज्य को इस आयोग के दायरे से बाहर रखा गया था।

राज्यों का पुनर्गठन मुख्य रूप से भाषा के आधार पर हुआ था। उसके बाद भी राज्यों के पुनर्गठन का सिलसिला बंद नहीं हुआ है और कुछ साल पहले ही तीन नए राज्य उत्तराँचल, झारखंड और छत्तीसगढ़ बनाए गए हैं।

जम्मू-कश्मीर में भी तीनों ही क्षेत्रों में अलग अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृति है, अलग-अलग जातीय समुदाय के लोग रहते हैं और तीनों ही क्षेत्रों की भौगोलिक संरचना भी एक दूसरे से बिल्कुल अलग है।

मुस्लिम माँग

लेह के बौद्ध लोगों के उलट करगिल के मुस्लिम लोग लद्दाख़ के लिए केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के ख़िलाफ़ नज़र आते हैं। करगिल के मुसलमानों के एक प्रमुख संगठन इमाम ख़ुमैनी मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष असग़र क़रबलाही कहते हैं कि लद्दाख़ जम्मू-कश्मीर की एक हिस्सा है और उसी के साथ उसका अस्तित्व बरक़रार रहना चाहिए।

करबलाही कहते हैं कि लद्दाख़ बिना शर्त भारत का हिस्सा रहना चाहिए लेकिन जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से के रूप में ही इसका समुचित विकास संभव है। “लद्दाख़ का लेह ज़िले में तो पहले से ही बहुत विकास हो चुका है लेकिन कागिल तक लोगों की पहुँच मुश्किल होने की वजह से वह अभी तक बहुत पिछड़ा हुआ है।”

करगिल के मुसलमान कट्टर रूप से भारत के समर्थक माने जाते हैं और 1999 में पाकिस्तान की तरफ़ से घुसपैठ के मौक़े पर उन्होंने भारतीय सेना का साथ दिया था। करबलाही कहते हैं कि लद्दाख़ के भविष्य के बारे में कोई फैसला करने से पहले करगिल के लोगों की भी राय ली जानी चाहिए और करगिल के लोग एक वृहत्तर लद्दाख़ यानी ग्रेटर लद्दाख़ के हिमायती हैं न कि उसे एक केंद्रशासित प्रदेश बनाने के।

ये है मोदी और डोभाल का मिशन कश्मीर

बहरहाल अब जो खबर सामने आयी है, उसके मुताबिक़ एनएसए डोभाल का भी मानना है कि जम्मू-कश्मीर को तीन अलग-अलग राज्यों में बाँट देना ही समस्या का सटीक समाधान है। साथ ही भविष्य में इन राज्यों में किसी अन्य तरह की राजनीति समस्या ना खड़ी हो, इसके स्थायी समाधान के लिए तीनों राज्यों को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाना चाहिये।
  जिससे वहा पनप रहा देशद्रोही बीज आगे न बढ़ सके और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि भी सबसे अच्छी और आक्रामक रहे ।
 दोस्तों ज्यादा समय नही लगेगा अब भारत का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर को माननीय प्रधानमंत्री जी असली स्वर्ग बनाने की तैयारी में है।।
  जय हिंद
जय भारत।।।।

Comments